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पाचन शक्ति बढाने के लिये योगासन


एक स्वस्थ जीवन व्यतीत करने के लिए स्वस्थ शरीर की आवश्यकता होती है| स्वस्थ शरीर की बात करे तो पाचन तंत्र मुख्यतः सभी प्रकार के स्वास्थ्य का मुख्य भाग होता है| अगर हमारा पाचन तंत्र स्वस्थ एवं दुरुस्त है तो हमारा शरीर भी स्वस्थ, मजबूत एवं कई बीमारियों से परे हो जाता है| आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में भी हम अपने शरीर को स्वस्थ एवं ऊर्जावान रख सकते है| यहाँ हम पाचन शक्ति बढाने के लिये योगासन के बारे में चर्चा करेंगे|

आज के समय में हमारा जीवन इतना व्यस्त हो गया है कि हमारे पास अपने लिए समय ही नहीं रहता| अस्वास्थ्यकर जीवनशैली जैसे पर्याप्त नींद न लेना, जंक फ़ूड खाना, तनाव, व्यस्त दिनचर्या आदि, हमारे शरीर को कमजोर करते है और बीमारी का कारण बनते है, जिसका असर हमारी जीवनशैली पर पड़ता है| लेकिन समय के आभाव में भी हम कुछ हल्के-फुल्के योगासन कर अपने शरीर को फिट रख सकते है|

पाचन तंत्र क्या है?

पाचन तंत्र हमारे शरीर का मुख्य तंत्र होता है| यह विभिन्न अंगों का समूह है जो एक साथ कार्य करता है | इसमें, आपके द्वारा खाया जाने वाला भोजन विभिन्न अंगों से होकर गुजरता है, जहाँ यह छोटे घटकों में विभाजित होकर आपके शरीर द्वारा अवशोषित किया जाता है|

लेकिन कभी-कभी ये अंग अच्छी तरह काम नहीं करते हैं और अपच, कब्ज, पेट में जलन, एसिडिटी, और अन्य गैस संबंधी परेशानी का कारण बनते है|

योग पाचन के लिए अच्छा क्यों है?

योग कैलोरी बर्न करने के साथ-साथ हमारे शरीर को टोन करता है| यह वैज्ञानिक सिद्ध मुद्राओं और श्वाँस तकनीकों का एक संयोजन है| सच्चे अर्थ में यह मन और शरीर दोनों के लिए है| योग का इतिहास 5000 वर्षों से अधिक पुराना है| यह कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के उपचार में विश्वसनीय और प्रभावी सिद्ध हुआ है| योग विभिन्न आसनो के माध्यम से आंतरिक अंगों में खिंचाव उत्पन्न कर पाचन शक्ति को बढ़ाता है| इसलिए हर बार दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय हमे योग द्वारा इन समस्याओं को दूर करने का प्रयास करना चाहिए|

इन पाचन संबंधी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए और अपने पाचन तंत्र को मजबूत करने के लिए हम निम्नलिखित योग कर सकते है|

पाचन तंत्र मजबूत एवं दुरुस्त रखने वाले योगासन

ये योगासन हमारा पाचन सुधारने में लाभकारी सिद्ध हुए है| आइये जानते है इन योगासन के बारे में|

1. वज्रासन Vajrasana in Hindi

इसे वज्र मुद्रा, डायमंड मुद्रा, पेल्विक पोज आदि नामों से जाना जाता है | यह साइटिका से होने वाले दर्द में राहत देता है | जांघो को मजबूत बनाता है | यदि भोजन के पश्चात इस आसन को किया जाए तो पाचन तंत्र मजबूत होता है |

वज्रासन कैसे करे? How to do Vajrasana in Hindi

  1. इस आसन को करने के लिए सबसे पहले दण्डासन मुद्रा में बैठे|
  2. उसके लिए अपने दोनों पैरों को फैलाए और सीधे बैठे|
  3. अपने दोनों कूल्हों को जमीन से स्पर्श करते हुए हथेली को कूल्हों के पास जमीन पर रखे|
  4. सुनिश्चित करे कि अपने शरीर के वजन को अपने हाथों पर न डाले|
  5. अब अपने दाहिने पैर को मोड़ें और अपने दाहिने कूल्हे के नीचे रखें।
  6. फिर अपने बाएं पैर को मोड़ें और इसे बाएं कूल्हे के नीचे रखें।
  7. सुनिश्चित करें कि आपकी जांघें आपस में सटी हो और आपके पैर एक दूसरे को छू रहे हो।
  8. अब अपने दोनों हाथों को अपने घुटनों पर रखें।
  9. सुनिश्चित करें कि आपकी ठोड़ी जमीन के समानांतर हो।
  10. अपनी पीठ को सीधा रखें और अपने शरीर को ढीला छोड़ दें।
  11. अब सामान्य रूप से साँस ले और कुछ समय के लिए इसी मुद्रा में बने रहें।
  12. कुछ मिनटों तक इसी मुद्रा में रहने के बाद अपने शरीर को दाईं ओर झुकाए और अपने बाएं पैर को सीधा करें।
  13. उसके बाद अपने शरीर को बाईं ओर झुकाए और दाहिना पैर सीधा करे|
  14. ऐसा करने से आप दण्डासन मुद्रा में वापस आ जाएंगे।
  15. इस आसन को 1-2 बार दोहराएँ|

वज्रासन के लाभ Benefits of Vajrasana in Hindi

  1. भोजन के पाचन में मदद करता है और पाचन तंत्र में सुधार करता है।
  2. साइटिका और पीठ के निचले हिस्से के दर्द में राहत देता है|
  3. आपकी रीढ़ को सीधा करने में मदद करता है।
  4. पैरों की नसों को मजबूत करता है।
  5. आपकी जांघों को मजबूत बनाता है।

वज्रासन करते समय सावधानियाँ

  1. यदि आपको घुटने या टखने में दर्द है तो इस आसन को न करें।
  2. बवासीर रोगी इस आसन को न करे|
  3. यदि आपकी सर्जरी हुई है तो इस आसन को न करे|

2. उष्ट्रासन या कैमल पोज़ Ustrasana in Hindi

यह एक बहुत ही सरल आसन है| इस आसन को करते समय शरीर ऊंट के आकार सा दिखाई देता है इसीलिए इसे उष्ट्रासन कहते है| यह आसन मानसिक और शारीरिक रूप से शरीर को स्वस्थ बनाता है|

यह आसन पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है। इस आसन को खाली पेट किया जाना चाहिए और अगर सुबह खुली हवा में किया जाए तो यह बहुत फायदेमंद होता है।

उष्ट्रासन कैसे करें? How to do Ustrasana in Hindi

  1. सबसे पहले खुली एवं समतल जगह पर एक आसन या चटाई बिछा ले|
  2. अब चटाई पर दोनों पैर आगे की तरफ फैला कर बैठ जाए| फिर दाये पैर को पीछे की ओर घुटने से मोड़कर दाये नितम्ब के नीचे लगा ले, ठीक इसी प्रकार बाये पैर को पीछे की तरफ घुटने से मोड़कर दाये नितम्ब के नीचे लगा ले, ठीक उसी प्रकार जैसे वज्रासन में होता है|
  3. अब दोनों पैरो और पंजो को जमीन पर सटाकर धीरे-धीरे घुटनो के बल ऊपर तब तक उठेंगे जब तक हमारी कमर सीधी न हो जाए|
  4. फिर दाये हाथ से दाये पैर की एड़ी और बाये हाथ से बाये पैर की एड़ी पकड़ेंगे और सिर और कंधो को भी जितना पीछे ले जा सकते है उतना पीछे ले जाएंगे|
  5. फिर गहरी साँस लेते हुए उसी अवस्था में आरामदायक स्थिति में कुछ देर रुकेंगे|
  6. दोनों हाथ को एड़ियों से धीरे-धीरे हटाकर वापस पहले वाली स्थिति में लौटेंगे|
  7. अगर आपको पुनः यह आसन दोहराना है तो वज्रासन की स्थिति में ही रहे और वही से दोबारा शुरू करे|

उष्ट्रासन के लाभ Benefits of Ustrasana in Hindi

  1. पेट और आंत की मांसपेशियों को खींचकर पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है|
  2. कब्ज की समस्या में राहत दिलाता है।
  3. प्रजनन शक्ति को बढ़ाता है।
  4. यह रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाता है, जिससे स्लिप-डिस्क और साइटिका की समस्याओं में राहत मिलती है।
  5. यह शरीर के हार्मोन को नियंत्रित करता है।
  6. यह गर्दन और छाती की मांसपेशियों को टोन करता है और उन्हें मजबूत बनाता है।
  7. यह आसन चेहरे की चमक बढ़ाने और चेहरे पर सुंदरता लाने के लिए बहुत फायदेमंद है।
  8. यह फेफड़ों की क्षमता को भी बढ़ाता है

उष्ट्रासन करते समय सावधानियाँ

  1. गर्भवती महिलाएँ इस आसन को बिलकुल भी ना करे|
  2. बीपी की समस्या से ग्रसित व्यक्ति भी इस आसन से दूरी बनाए|
  3. जिन व्यक्तियों की शरीर के किसी भी अंग की सर्जरी हुई हो वो भी इस आसन को ना करे|
  4. माइग्रेन के मरीज भी इस आसन से दूरी बनाए|
  5. गर्दन में दर्द वाले व्यक्ति भी इस आसन को ना करे|
  6. अच्छे ट्रेनर से सीखने के पश्चात ही इस आसन को करे|

3. सेतु बंधासन Setu Bandhasana in Hindi

यह आसन पाचन तंत्र और कमर से जुडी समस्याओ के लिए एक चमत्कारिक आसन सिद्ध हुआ है| जैसा नाम से पता चल रहा हैं, इस आसन में शरीर एक सेतुबांध की मुद्रा में आ जाता है और पेट कमर और पैर की सारी मांसपेशियों में खिंचाव उत्पन्न करके इनसे संबंधित बीमारियों पर अंकुश लगाता है।

सेतु बंधासन कैसे करे? How to do Setu Bandhasana in Hindi

  1. सबसे पहले पैरो के बीच अंतर बनाते हुए पीठ के बल चटाई पर लेट जाए और दोनों हाथो को सीधा रखते हुए हथेलियाँ आसमान की तरफ कर ले| इस मुद्रा को शवाशन कहते है|
  2. फिर दोनों पैरो को जोड़े और घुटनो को मोड़ते हुए अपने कूल्हों के पास ले आये|
  3. फिर दोनों पैरो के टखनो को दोनों हाथो से पकडे|
  4. अब धीरे-धीरे साँस अंदर लेते हुए अपने कूल्हों को जितना संभव हो उतना ऊपर उठाए| ध्यान रहे हमारा शरीर एक बाँध के आकर की स्थिति में होना चाहिए|
  5. हमारा सिर और कंधे जमीन पर होने चाहिए और घुटने और पैर एक सीध में बिल्कुल सीधे हो|
  6. इस स्थिति में सामान्य तरीके से साँस लेते और छोड़ते हुए तकरीबन तीस सेकंड तक रुके|
  7. फिर धीरे-धीरे साँस छोड़ते हुए कमर को जमीन पर टिका ले और पैर सीधे कर शवाशन की मुद्रा में आ जाए|

सेतुबंधासन के फायदे Benefits of Setubandhasana in Hindi

  1. यह आसन पाचन क्रिया में सुधार लाता है और पेट संबंधी सभी जटिल रोगो को दूर करता है|
  2. कब्ज को दूर करता है|
  3. यह आसन पेट और पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों में खिचाव उत्पन्न कर मजबूत बनाता है|
  4. पैरो और पेट की चर्बी काम करता है|
  5. पैर की मांसपेशियों को भी मजबूती प्रदान करता हैं|
  6. कमर दर्द में भी यह आसन लाभप्रद है|

सेतु बंधासन करते समय सावधानियाँ

  1. हर्निया और सर्जरी वाले लोग यह आसन ना करे|
  2. जिनकी हाल ही में सर्जरी हुई है, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए|
  3. गर्भवती महिलाओं को यह आसन नहीं करना चाहिए।
  4. महिलाएँ मासिक धर्म में इस आसन को ना करे|

4. नौकासन Naukasana in Hindi

नौकासन में व्यक्ति के शरीर की स्थिति एक नाव के समान होती है| इस आसन में शरीर के लगभग सभी अंगो का एक साथ प्रयोग होता है, इसी लिए यह आसन शरीर के सभी अंगो के लिए बहुत ही लाभदायक है|

नौकासन कैसे करे? How to do Naukasana in Hindi

  1. सबसे पहले खुली एवं समतल जगह पर एक आसन या चटाई बिछा ले|
  2. फिर पीठ के बल लेट जाइये|
  3. गहरी लम्बी साँस भरते हुए दोनों पैरों के अँगूठे से अँगूठे और एड़ी से एड़ी मिलाइये और हाथो को शरीर से चिपकाकर रखे|
  4. अब सिर, छाती, हाथो और पैरो को २०-३० डिग्री के कोण तक ऊपर उठाए|
  5. घुटनो को बिल्कुल सीधा रखे और हाथो को अपने जांघो के ऊपर बिल्कुल सीधा रखे|
  6. शरीर का पूरा भार नितम्भ पर छोड़ दे और हाथो और पैरों की उँगलियाँ समान्तर (एक दिशा में) रखे|
  7. अपनी क्षमता के अनुसार आप इस स्थिति में २०-३० सेकेंड रुके और साँस छोड़ते हुए पुनः उसी अवस्था में लौट आए|
  8. एक चक्र पूरा होने पर आप इसे अपनी क्षमता अनुसार 2-4 बार दोहरा सकते है|

नौकासन के फायदे Benefits of Naukasana in Hindi

  1. यह आसन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। पाचन संबंधी सभी विकारों को दूर करता है। जैसे कब्ज, जलन, पेट फूलना और बदहजमी आदि।
  2. यह आसन पेट की चर्बी, कमर की चर्बी और मोटापे को तेजी से कम करने में बहुत फायदेमंद है|
  3. किडनी अच्छे ढंग से कार्य करती है और स्पाइनल कॉर्ड मजबूत बनती है|
  4. हर्निया से पीड़ित व्यक्तियों के लिए यह एक बहुत ही फायदेमंद आसन है| लेकिन डॉक्टर की सलाह के बगैर न करे|

नौकासन करते समय सावधानियाँ

  1. कमरदर्द, पेट दर्द, माइग्रेन, सरदर्द, आदि की स्थिति में यह आसन न करे|
  2. हाई और लौ बीपी से पीड़ित व्यक्ति यह आसन बिल्कुल ना करे|
  3. गर्भवती महिलाएँ और मासिक धर्म के शुरूआती दो दिन यह आसन बिल्कुल ना करे|

5. उत्तानपादासन Uttanpadasana in Hindi

इस आसन में पैरो को पीठ के बल लेटकर ऊपर उठाया जाता है| इस आसन के नियमित प्रयोग से पाचन तंत्र मजबूत और दुरुस्त तो होता ही है बल्कि पाचन संबंधी विकार जैसे गैस, कब्ज, पेट फूलना, बदहजमी और पेट पर जमी अतिरिक्त चर्बी से छुटकारा मिलता है|

उत्तानपादासन कैसे करे? How to do Uttanpadasana in Hindi

  1. सबसे पहले खुली एवं समतल जगह पर आसन या एक चटाई बिछा ले|
  2. जमीन पर सीधा लेट जाए और दोनों पैरो को फैला ले और दोनों हाथो को जमीन की तरफ सीधा फैला ले|
  3. फिर दोनों पैरो के पंजे मिलाते हुए लगभग एक फ़ीट ऊपर उठाए और कुछ समय इसी स्थिति में पैरो को रखे|
  4. फिर धीरे-धीरे दोनों पैरो को वापस उसी स्थिति में ले आये|
  5. आप इस आसन को 5-8 बार दोहराये|

उत्तानपादासन के फायदे Benefits of Uttanpadasana in Hindi

  1. इस आसन से सबसे ज्यादा लाभ हमारे पाचन तंत्र को होता है| पेट से जुडी सभी समस्याएँ जैसे पुराने से पुराना कब्ज, पेट फूलना, बदहज़मी, आदि से पूर्ण रूप से छुटकारा मिलता है| और पाचन क्रिया भी ठीक रहती है|
  2. पेट पर जमी अतिरिक्त चर्बी भी कुछ ही दिनों के अभ्यास से छूमंतर हो जाती है|
  3. उत्तानपादासन आँतों को मजबूत बनाता है|
  4. इस आसन से पैरों से जुडी समस्याएँ जैसे पैरों में दर्द, सूजन, सनसनाहट, और अतिरिक्त चर्बी आदि में भी लाभ होता है|
  5. कमर दर्द में राहत मिलती है क्यूँकि कमर की मांसपेशियों में खिंचाव होने से वह मजबूत बनती है|
  6. यह आसन तनाव कम करता है|
  7. यह आसन थायराइड, हर्निया, मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों में भी बहुत लाभदायक होता है|
  8. यह आसन महिलाओं के लिए लाभप्रद है| यह गर्भाशय को मजबूत बनाता है और उससे जुडी समस्याओं को दूर करता है|

उत्तानपादासन करते समय सावधानियाँ

  1. अगर कमर दर्द ज्याद है तो इस आसन को न करे|
  2. स्लिप डिस्क की अगर समस्या है तो भी इस आसन को न करे|
  3. उच्च रक्त चाप की समस्या है तो इस आसन से बचे|
  4. गर्भवती महिलाएँ डॉक्टर की सलाह लेकर ही इस आसन को करे|
  5. जिन व्यक्तियों की शरीर के किसी भी अंग की सर्जरी हुई हो वो भी इस आसन को न करे|

6. पवनमुक्त आसन Pawanmuktasana in Hindi

यह आसान देखने में जितना सरल है उतना ही लाभकारी भी है| इस आसान के नाम से ही हमे पता चल रहा है कि पवन का मुक्त होना| यह आसान हमारे शरीर से दूषित वायु को बाहर निकालने में सहायक होता है| पेट में बनी गैस बाहर निकालने वाला यह आसन पाचन शक्ति बढ़ाता है| यह आसन हमारे शरीर के कई अंगो जैसे कमर, पैर, आंत, गर्दन आदि के लिए बहुत लाभदायक होता है| यह आसान इन अंगो को टोन करता है|

पवनमुक्तासन कैसे करे? How to do Pawanmuktasana in Hindi

  1. स्वच्छ व् सपाट जगह पर सीधे लेट जाए|
  2. अब अपने दाये पैर को घुटने से मोड़ते हुए, दोनों हाथो की अँगुलियों को परस्पर मिलाकर मोडे हुए घुटने के ऊपर रखे और घुटने को पेट से मिला दे| फिर सिर को ऊपर उठा कर मोड़े हुए घुटने पर नाक लगाए|
  3. दूसरा पैर इस दौरान जमीन पर सीधा रखे|
  4. इस आसन को करते हुए श्वाँस को कुछ सेकंड रोक कर रखे|
  5. अब मुड़ा हुआ पैर और सिर धीरे-धीरे करते हुए वापस उसी स्थिति में ले जाए|
  6. अब यही क्रिया बायें पैर से दोहराए|
  7. यह आसन दोनों पैर एक साथ मोड़कर भी किया जा सकता है|

पवनमुक्तासन के फायदे Benefits of Pawanmuktasana in Hindi

  1. नियमित अभ्यास से पाचन तंत्र मजबूत होता है और पाचन शक्ति बढ़ती है|
  2. इस आसान से गैस, एसिडिटी, कब्ज, पेटदर्द जैसी समस्याओं से छुटकारा पा सकते है|
  3. पेट और कमर की बढ़ी चर्बी को भी यह आसन ख़त्म करता है|
  4. कमरदर्द, साइटिका, हृदय रोग, गठिया जैसी बीमारियों में भी यह आसन लाभप्रद होता हैं|
  5. महिलाओं के लिए गर्भाशय संबंधी रोगो में भी यह आसन काफी लाभकारी होता है|
  6. मेरुदंड और कमर के निचले हिस्से में दर्द और तनाव से छुटकारा मिलता हैं|

पवनमुक्तासन करते समय सावधानियाँ

  1. तेज कमर में दर्द हो तो यह आसन नहीं करना चाहिए|
  2. अगर घुटनो में असहनीय दर्द हो तो भी यह आसन बिल्कुल न करे|
  3. हर्निया से ग्रस्त व्यक्तियों को भी यह आसन नहीं करना चाहिए|
  4. गर्भवती स्त्रियों को यह आसन नहीं करना चाहिए|
  5. महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान यह आसन नहीं करना चाहिए|

7. धनुरासन Dhanurasana in Hindi

इस आसन में शरीर की स्थिति धनुष के सामान हो जाती है, इसलिए इस आसन को धनुरासन भी कहते है| यह आसन हमारी पाचन प्रणाली को मजबूत और रोगमुक्त बनाता है| यह आसन कमर और रीढ़ की हड्डी के लिए भी बहुत ही लाभकारी सिद्ध हुआ है|

धनुरासन कैसे करे? How to do Dhanurasana in Hindi

  1. पवनमुक्त आसन के बाद यह आसन जरूर करे|
  2. इस आसन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर पेट के बल लेट जाइये|
  3. फिर दोनों पैरो को घुटने से मोड़ लीजिये और दोनों पैरो को हाथो को कसकर पकड़ लीजिये|
  4. फिर दोनों पैरो को, घुटनो को जांघो को सिर और छाती को धीरे-धीरे ऊपर उठाये|
  5. याद रखे अब आपका शरीर धनुष को तरह पूरा कैसा हुआ हो|
  6. इस स्थिति में जितना समय आरामदायक हो तब तक रुके और पुनः अपनी स्थिति में आ जाए|

धनुरासन के फायदे Benefits of Dhanurasana in Hindi

  1. इस आसन का सर्वाधिक लाभ पाचन प्रणाली को मजबूत करने में होता है|
  2. इस आसन से रीढ़ की हड्डी लचीली और मजबूत बनती है|
  3. पाचन से जुडी सारी समस्याऐ इस आसन को करने से ख़त्म हो जाती है|
  4. पेट को चर्बी कम होती है और मोटापा कम होता है|
  5. पैर और कंधो के लिए यह आसन काफी फायदेमंद होता है|
  6. मासिक धर्म संबंधी विकार दूर करने के लिए यह आसन बहुत लाभदायक होता है|

धनुरासन करते समय सावधानियाँ

  1. हर्निया, अलसर, हाई बीपी, गर्दन में चोट , सरदर्द , माइग्रेन और आँत की बीमारी है तो ऐसे लोगो को यह आसन नहीं करना चाहिए|
  2. प्रेग्नेंट औरते और मानसिक धर्म के समय इस आसन को न करे|
  3. ज्यादा कमरदर्द होने की स्थिति में इस आसन को न करे|